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नकद खर्चा आ रोज ₹10,000 क सीमा

नकद देब जल्दी होइत अछि, मुदा इनकम टैक्स कानूनकेँ पैघ नकद खर्चा पसिन नहि। एक आदमीकेँ एके दिन ₹10,000 सँ बेसी नकद देलहुँ तँ ओ खर्चा अहाँक नफा-नुकसानक हिसाबसँ हटाओल जा सकैत अछि, माने ओहि पर एना टैक्स देबय पड़त जेना अहाँ खर्चे नहि केने छी।

नियम

जँ बिजनेस कोनो एक आदमीकेँ एके दिन ₹10,000 सँ बेसी नकद (वा बेयरर चेक) मे दैत अछि, तँ टैक्स बला नफा निकालैत काल ओ भुगतान खर्चा नहि मानल जाइत अछि। सीमा ओहि दिन ओहि आदमीकेँ देल सभ भुगतान जोड़ि क देखल जाइत अछि: एके सप्लायरकेँ एक दिन ₹4,000 क तीन टा नकद भुगतान माने ₹12,000, आ नियम टूटि जाइत अछि।

माल गाड़ी चलबय बला, भाड़ा वा लीज पर देबय बला ट्रांसपोर्टरकेँ भुगतान लेल सीमा रोज ₹35,000 अछि।

ई इनकम टैक्स एक्ट, 1961 क धारा 40A(3) छल, आ यैह नियम 1 अप्रैल 2026 सँ लागू इनकम टैक्स एक्ट, 2025 मे चलि रहल अछि।

एकटा उदाहरण

एकटा दोकान 12 नवंबरकेँ वायरिंगक काज लेल इलेक्ट्रीशियनकेँ ₹14,000 नकद दैत अछि। ₹14,000 खर्चा नहि मानल जाइत अछि: दोकानक नफा ₹14,000 बेसी गनल जाइत अछि। जँ UPI वा बैंक ट्रांसफरसँ देने रहितहुँ, वा अलग-अलग काज लेल 12 नवंबरकेँ ₹7,000 आ 13 नवंबरकेँ ₹7,000 देने रहितहुँ, तँ खर्चा मानल जाइत। मात्र सीमासँ नीचाँ रहबा लेल एक बिलकेँ दू दिन मे बाँटब खतरनाक अछि; बैंकसँ भुगताने साफ तरीका अछि।

छूट

इनकम टैक्स नियम (पुरान नियमक नियम 6DD) किछु स्थिति मे पैघ नकद भुगतान सेहो मानैत अछि, जेना बैंक आ सरकारकेँ भुगतान, बिना बैंक बला गाम मे भुगतान, आ किसानकेँ फसलक किछु भुगतान। ई सीमित अछि; अकाउंटेंटसँ बिना पुछने कोनो लागू नहि बुझू।

नकद खर्चा सुरक्षित राखब

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